ओमप्रकाश कश्यप

जन्म सन 1959, जिला बुलंदशहर के एक गांव में. शिक्षा परास्नातक दर्शनशास्त्र. विगत अठाइस वर्षों से शब्दों से अटूट दोस्ती और प्यार. उपन्यास, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, लेख, विज्ञान, नाटक, कविता, बालसाहित्य, जीवनी आदि विधाओं में नियमित लेखन-प्रकाशन. अभी तक तीस पुस्तकें प्रकाशित, कई अन्य चार प्रकाशनाधीन. साप्ताहिक समाचारपत्रों में व्यंग्य का॓लम तथा मासिक पत्रिका ‘सहकार संचय’ में सहकारिता आंदोलन पर करीब तीन साल तक नियमित लेखन. प्रकाशित पुस्तकों में अभी तक पांच उपन्यास, चार नाटक संग्रह, तीन कहानी संग्रह, जीवनी, विज्ञान तथा व्यंग्य संग्रह के अतिरिक्त लगभग एक दर्जन पुस्तकें बालसाहित्य पर प्रकाशित. हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा सन 2002 में कविता पुस्तक ‘वृक्ष हमारे जीवनदाता’ के लिए ‘बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान’. साथ ही विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में सहस्राधिक रचनाएं प्रकाशित एवं चर्चित!

प्रकाशित कृतियां

उपन्यास : जुग-जुग जीवौ भ्रष्टाचार, विजयपथ, ढाई कदम, जहरबाद, मिश्री का पहाड़
कहानी/बालकहानी संग्रह : नन्ही का बटुआ, सोन मछली और हरी सीप, कहानी वाले बाबा, फरिश्ते, साहसी की सदा जय
व्यंग्य-संग्रह : ताकि मनोबल बना रहे
नाटक-संग्रह : पुल कहां नही है, स्वयंवर में लड़की, उत्सर्ग
बालकविता-संग्रह : वृक्ष हमारे जीवनदाता
जीवनी : जननायकः डा॓. भीमराव आंबेडकर
विज्ञान : आइंसटाइन और आपेक्षिकता का सिद्धांत
लघुकथा-संग्रह : पगडंडियां
सहकारिता : सहकारिता आंदोलन : उदभव एवं विकास (दो खंड)

समाजवाद : समाजवादी चिंतन की पृष्ठभूमि, समाजवादी चिंतन के विविध आयाम.
बालनाटिकाएं : हलवाई की दुकान से, दो राजा अलबेले तथा बच्चों के लिए करीब दर्जन-भर                              पुस्तकें
प्रकाशनाधीन : सहकारिता आंदोलन का वैश्विक परिदृश्य, धर्म एवं अभिजन संस्कृति

ब्लाग : आखरमाला एवं संधान

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24 विचार “ओमप्रकाश कश्यप&rdquo पर;

  1. omprakash kashyap कहते हैं:

    ओमप्रकाश कश्यप
    15 जनवरी, 1959, जिला बुलंदशहर, भारत के गांव बारौली वासदेवपुर में. शिक्षा परास्नातक दर्शनशास्त्र. विगत 35 वर्षों से शब्दों से दोस्ती. उपन्यास, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, समीक्षा, विज्ञान, नाटक, कविता, बालसाहित्य, समाजवाद, सहकारिता, जीवनी आदि विधाओं में नियमित लेखन-प्रकाशन. अभी तक तैंतीस पुस्तकें प्रकाशित. प्रकाशित पुस्तकों में पांच उपन्यास, चार नाटक संग्रह, तीन कहानी संग्रह, जीवनी, विज्ञान, व्यंग्य संग्रह तथा वैचारिक साहित्य के अतिरिक्त करीब एक दर्जन पुस्तकें बालसाहित्य पर प्रकाशित. हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा सन 2002 में कविता पुस्तक ‘वृक्ष हमारे जीवनदाता’ के लिए ‘बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान’. साथ ही विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में सहस्राधिक रचनाएं, लेख आदि प्रकाशित एवं चर्चित!

    प्रकाशित कृतियां

    उपन्यास : जुग-जुग जीवौ भ्रष्टाचार, विजयपथ, ढाई कदम, जहरबाद, मिश्री का पहाड़.
    कहानी /बालकहानी संग्रह : नन्ही का बटुआ, सोन मछली और हरी सीप, कहानी वाले बाबा, फरिश्ते. साहसी की सदा
    जय
    वैचारिक : सहकारिता आंदोलन : उदभव एवं विकास (दो खंड)
    समाजवादी चिंतन की पृष्ठभूमि
    समाजवादी चिंतन के विविध आयाम
    व्यंग्य-संग्रह : ताकि मनोबल बना रहे (इक्यावन व्यंग्य रचनाएं)
    नाटक-संग्रह : पुल कहां नही है, स्वयंवर में लड़की, उत्सर्ग
    विज्ञान : आइंस्टीन और आपेक्षिकता का सिद्धांत
    समीक्षा : हरिकृष्ण देवसरे का बालसाहित्य
    जीवनी : जननायक : डा॓. भीमराव आंबेडकर
    लघुकथा-संग्रह : पगडंडियां
    बालकविता-संग्रह : वृक्ष हमारे जीवनदाता, जल ही जग का जीवन दाता
    बालनाटिकाएं : हलवाई की दुकान से, दो राजा अलबेले
    बालसाहित्य : एक दर्जन से अधिक पुस्तकें
    प्रकाशनाधीन : धर्म एवं अभिजन संस्कृति,
    परिकथाएं और विज्ञान
    सहकारिता आंदोलन : वैश्विक परिदृश्य आदि
    ब्लाग : ’आखरमाला’ एवं ’संधान’
    Email : opkaashyap@gmail.com

    1. कश्‍यप जी सादर अभिवादन। आपका लेखन मुझे बहुत पसंद हैं। बहुत पढ़ा है आपको। साथ ही आपके इस ब्‍लाग पर कम्‍यूनिज्‍़म पर आलेख देख कर दिल खुश हो गया। मुझे आप कम्‍यूनिष्‍ट विचारधारा से प्रभावित व्‍यक्ति मालूम पड़ते हैं।

      1. ओमप्रकाश कश्यप कहते हैं:

        धन्यबाद कहकशां जी,
        लेखक और लेखन दोनों की सार्थकता पाठकों के साथ है. आपको मेरी रचनाएं पसंद आती हैं, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं. मैं ‘कम्युनिस्म’ और ‘साहित्य’ में अंतर नहीं मानता. जो मानते हैं, वे मेरा मानना है, केवल लेखन के लिए लेखन करते हैं. बिना किसी सरोकार के. यदि आपका लेखन समाज के लिए है तो स्वत: ही वह कम्यूनिस्म के दायरे में चला जाता है. साहित्यकार का सही पंथ वामपंथ है—जो ऐसा नहीं सोचते वे लेखक और शब्दकार हो सकते हैं, साहित्यकार नहीं.
        प्रतिक्रिया के लिए आभार

  2. मैंने संभवत: कभी यह बात जाहिर नहीं की, पर हिन्‍दी बाल साहित्‍य में मैं जिन रचनाकारों की लेखनी का मुराद हूं, उनमें से एक आप भी हैं। आपको पढकर सचमुच आनंद आ जाता है।

    ——
    ब्‍लॉग समीक्षा की 32वीं कड़ी..
    पैसे बरसाने वाला भूत…

    1. kashyap omprakash कहते हैं:

      सृजनशिल्पी पर जो लेखांश मैंने टिप्पणी के रूप में दिया था, वह असल में ‘हिंद स्वराज’ पर मेरे लंबे आलोचनात्मक लेख का एक हिस्सा है. उस लेख ‘ट्रस्टीशिप की सैद्धांतिकी और गांधीवाद के अंतर्विरोध’ का मात्र एक हिस्सा, ‘गांधीजी के ट्रस्टीशिप संबंधी सिद्धांत के कमजोर पक्ष’ मैंने आपके लेख पर प्रतिक्रिया के रूप में जोड़ दिया था. पूरा आलेख ब्लाग पर दिया गया है. इंटरनेट पर अभी वैचारिक विषयों को लेने का गंभीर चयन नहीं है. मुझे आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी,
      पूरा लेख : https://omprakashkashyap.wordpress.com/2011/10/02/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95/
      ओमप्रकाश कश्यप

  3. आदरणीय ओमप्रकाश जी,
    नमस्कार .
    आपका ब्लॉग ‘अक्षरमाला’ कमाल है.इतनी जानकारियाँ ,दार्शनिकों का इतना शानदार संग्रह– सच पहले मैंने कहीं नही देखा.
    आपका लेखन का तरीका भी भी बेहद रोचक है.सरल ,सहज तरीके से भारी भरकम बात भी आप कह जाते हैं.
    मैं अभिभूत हूँ.और आपकी बहुत आभारी हूँ कि आप इतने शानदार संकलन कर रहे हैं जो पीढ़ियों तक काम आएगा.

    बहुत बधाई ,शुभकामनाओं और आभार के साथ सादर,
    –संध्या नवोदिता

    1. ओमप्रकाश कश्यप कहते हैं:

      हरीशजी
      पुस्तक में रुचि दर्शाने के लिए धन्यबाद. ‘सहकारिता आंदोलन : उद्भव एवं विकास’ पुस्तक दो खंडों में है. इसके प्रकाशक MPS Publishers & Distributors दिल्ली-110002 हैं. पुस्तक प्रिंट एशिया से आॅन लाइन भी मंगवाई जा सकती है.
      पुन: आभार
      ओमप्रकाश कश्यप

  4. ओम प्रकाश जी,
    मै सहकारिता के क्षेत्र में नये सिरे से काम करना चाहता हूं। ज़ाहिर है इसके लिये पुराना सब कुछ/अधिकांश जानना होगा। आपके लेख पढ़ रहा हूं। बेहतर होता कि आपसे इस पर मिलकर विस्तृत चर्चा हो, क्या यह संभव है? अगर नहीं तो हम लोग फोन/ व्हाटसैप/फेसबुक पर भी बात कर सकते हैं। कृपया आपसे संपर्क करके का कोई तरीका बतायें।
    मेरा संपर्क/व्हाटसैप नंबर है- 9617226783. फेसबुक पर मै Pavan Satyarthi नाम से हूं।

    1. ओमप्रकाश कश्यप कहते हैं:

      धन्यबाद सत्यार्थी थी,
      आज से करीब सात—आठ वर्ष पहले जब मैं सहकारिता पर काम कर रहा थी. उम्मीद इसलिए भी थी कि हिंदी में इस विषय पर सिवाय कुछ नोट्स टाइप पुस्तकों या सरकारी आंकड़ों के विवेचनात्मक पुस्तक नहीं है. जनसहभागिता के विचार में आस्था थी. इसलिए लगातार काम करता रहा. परंतु जब पुस्तकें तैयार करके प्रकाशक के पास ले गया तो उसकी पहली प्रतिक्रिया थी कि सहकारिता को आजकल कौन पूछता है.

      बहरहाल, आप विपुल संभावनाओं वाले इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, सो मैं न केवल आपको बधाई दूंगा, बल्कि आभार भी मानूंगा. मेरा मानना है कि भारत की आज जो समस्याएं हैं, उनका समाधान सहकारिता के रास्ते खोजा जा सकता है. हालांकि उसके लिए बहुत समर्थन की आवश्यकता है, उससे बड़ा विरोध पूंजीवादी ताकतों की ओर से हो सकता है, जो समाज को बांटे रखना चाहते हैं.

      मैं व्टाटअप का इस्तेमाल नहीं करता. गाजियाबाद में रहता हूं, और दिल्ली नियमित आना—जाना रहता है. आपका स्वागत है. फोन नंबर — 9013254232.
      नमस्कार, सादर….

  5. ओमप्रकाश कश्यप कहते हैं:

    धन्यबाद सत्यार्थी थी,
    आज से करीब सात—आठ वर्ष पहले जब मैं सहकारिता पर काम कर रहा थी. उम्मीद इसलिए भी थी कि हिंदी में इस विषय पर सिवाय कुछ नोट्स टाइप पुस्तकों या सरकारी आंकड़ों के विवेचनात्मक पुस्तक नहीं है. जनसहभागिता के विचार में आस्था थी. इसलिए लगातार काम करता रहा. परंतु जब पुस्तकें तैयार करके प्रकाशक के पास ले गया तो उसकी पहली प्रतिक्रिया थी कि सहकारिता को आजकल कौन पूछता है.

    बहरहाल, आप विपुल संभावनाओं वाले इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, सो मैं न केवल आपको बधाई दूंगा, बल्कि आभार भी मानूंगा. मेरा मानना है कि भारत की आज जो समस्याएं हैं, उनका समाधान सहकारिता के रास्ते खोजा जा सकता है. हालांकि उसके लिए बहुत समर्थन की आवश्यकता है, उससे बड़ा विरोध पूंजीवादी ताकतों की ओर से हो सकता है, जो समाज को बांटे रखना चाहते हैं.

    मैं व्टाटअप का इस्तेमाल नहीं करता. गाजियाबाद में रहता हूं, और दिल्ली नियमित आना—जाना रहता है. आपका स्वागत है. फोन नंबर — 9013254232.
    नमस्कार, सादर….

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